बुधवार, 16 अप्रैल 2014

मोदी का गिरेबाँ -क्या देखा कभी

दंगों पर माफी से जुड़ा टाला सवाल

['कांग्रेस पहले अपने पापों की माफी मांगे'][दंगों पर माफी से जुड़ा टाला सवाल]

गोधरा दंगों के लिए मोदी जी से बात की जाये और वे असहज न हो जाएँ ऐसा तो हो ही नहीं सकता आज फिर ऐसा ही हुआ और उनकी प्रतिक्रिया ने याद दिला दी दीवार फिल्म की जिसमे अमिताभ बच्चन अपने भाई शशि कपूर से कहता है कि ''जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरे हाथ पर ये लिख दिया कि मेरा बाप चोर है .''बिलकुल उसी अंदाज़ में मोदी जी ने कहा कि पहले कॉंग्रेस अपने पापों की माफ़ी मांगे ,देश में हिन्दू धर्मावलम्बियों के बहुत बड़े रहनुमा बनने वाले मोदी ,हिन्दू धर्म के संरक्षण का ठेका उठाने वाले मोदी क्या नहीं जानते कि जिस राजा के राज में जनता को जो भी कष्ट भुगतना पड़ता है उसके पाप का भागी राजा को होना पड़ता है, गुनहगार वही होता है जिस पर सेवा व् सुरक्षा का जिम्मा हो और यह जिम्मेदारी राजा पर ही होती है .कहने को आज राजतन्त्र नहीं है इसलिए राजा भी नहीं है किन्तु आज भी राजा तो होते हैं प्रधानमंत्री व् मुख्यमंत्री के रूप में और यहाँ गुजरात की बात हो रही है जो कि एक राज्य है और इसलिए यहाँ मुख्यमंत्री होने के कारण जिम्मेदार वही होते हैं और नरेंद्र मोदी अदालत से क्लीन चिट मिलने के बावजूद इन दंगों के ज्यादा उत्तरदायी हैं क्योंकि ये दंगे तो हुए भी उनके गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के तीन दिन के अंदर पैदा हुई स्थिति से और ये उत्तरदायित्व हमारे धर्मग्रंथों में हमारे इन कथित राजाओं के लिए निश्चित किया गया है और वहां धरती की अदालत पर मिली क्लीन चिट मान्य नहीं होती वहां व्यक्ति के अंतर्मन और कर्म महत्ता रखते हैं और इसलिए अपने कर्मों पर पश्चाताप को अंतर्मन शुद्धि का जरिया माना जाता है किन्तु मोदी जी शायद इस बारे में जानते नहीं या जानना चाहते भी नहीं .वे केवल सुख के साथी हैं और इसलिए वे वहां की प्रगति का ताज तो अपने सिर सजाते हैं और वहां के दंगों के गुनाह की जिम्मेदारी लेने से बचते हैं और ध्यान बटाने को विरोधियों के पाप गिनाने लग जाते हैं जबकि दूसरों के पाप गिनाने से अपने पाप कम नहीं होते वे तो अपने ही साथ जुड़े रहते हैं लेकिन मोदी जी ये अपनी जिम्मेदारी मानने को तैयार नहीं .लगता है जैसे जशोदा बेन को दिग्विजय सिंह के खुलासे और चुनाव आयोग की अनिवार्यता के बाद अपनी पत्नी माना वैसे ही कभी सैफ़ी सिरोजी के शब्दों में कहते हुए इसे भी मानेंगे -
''उम्रभर करता रहा हर शख्स पर मैं तब्सरे ,
झांककर अपने गिरेबाँ में कभी देखा नहीं .''
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

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