बुधवार, 9 अप्रैल 2014

सरकार केवल भारत सरकार



पश्चिमी यू.पी.की १० सीटों पर कल को मतदान होगा ,जैसा कि सभी और दिखाया जा रहा है कि मोदी लहर बह रही है जबकि विपक्ष लगातार उसे नकार रहा है किन्तु एक बात तो गौर करने लायक है कि हर दल की जुबां पर बस एकमात्र मोदी का ही नाम है चाहे विपक्षी दल हों या भाजपा स्वयं .विपक्षी मोदी नाम के शोर को दबाने के लिए और भाजपाई मोदी नाम के सहारे पार पाने के लिए .लेकिन एक बात तो साफ़ है वह ये है कि इस बार राजनीति का स्तर बहुत नीचे गिर गया है और इस सब के लिए कोई माने या न माने जिम्मेदारी मोदी पर ही है क्योंकि वे एकमात्र उम्मीदवार हैं जो किसी राष्ट्रीय पार्टी ने अधिकृत रूप से प्रधानमंत्री पद के प्रतिनिधि घोषित किये हैं और वे जिम्मेदार इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने अपने को प्रचारित करने के लिए सोनिया गांधी व् राहुल गांधी पर अपने घर की कीचड उछालने का कार्य किया .उन्होंने राजनीति में राष्ट्रीय क्षेत्र में आकर ऐसी भाषण शैली का इस्तेमाल किया जो कि आजतक यहाँ इस्तेमाल नहीं होती थी और ये सब उन्होंने तब किया जबकि वे स्वयं एक दागदार शख्सियत के मालिक हैं तो फिर ऐसे में उनपर इस तरह की छीटांकशी तो होनी ही थी और शायद वे चाहते भी ये ही थे क्योंकि वे राजनीति में हैं और ये ऐसी काजल की कोठरी है जहाँ कोई बगैर दाग लगे रह ही नहीं सकता बस ये सब करने के पीछे उनका उदेश्य यही था कि ''बदनाम भी होंगे तो क्या नाम भी तो होगा ''तो बस लग गए सोनिया राहुल को अनर्गल कुछ का कुछ कहने ,वे कहते हैं कि सोनिया राहुल को तो बस सत्ता की चिंता है तो ये सही है और होनी भी चाहिए क्योंकि सोनिया राहुल जानते हैं कि उनके परिवार ने इस देश के हित के लिए अपने बलिदान दिए हैं इसलिए इस देश में सत्ता में सही  लोग ही रहने चाहियें और जहाँ तक उनके लालच की बात है तो उसपर कोई भी सच्चा हिंदुस्तानी तो यकीन करने से रहा क्योंकि सोनिया गांधी के पास तो कई मौके आये जब वे भारत की प्रधानमंत्री बन सकती थी किन्तु उन्होंने ऐसा नहीं किया ..
मोदी जी ही क्या समस्त भाजपा वालों ने देखा है वह दौर जब इंदिरा जी की हत्या से शोकसंतप्त भारत ने अकेले राजीव गांधी जी को नहीं बल्कि जो भी कॉंग्रेस से खड़ा हो गया उसे संसद में पहुंचा दिया और तब इनके युगपुरुष भी माधव राव सिंधिया से हार गए थे जबकि स्वयं वहाँ की राजमाता इन युगपुरुष का साथ दे रही थी और यही फायदा वे अगर उठाना चाहती तो उठा सकती थी जब राजीव गांधी जी की हत्या हुई ,अगर वे ऐसा चाहती तभी तो मगर वे भारत की राजनीति में अपने परिवार के स्थान को देखते हुए भी इस ज़हर से दूर रहना चाहती थी .
ऐसे ही जब २००४ के चुनाव में कोंग्रेस जीती तब सभी चाहते तो थे सोनिया गांधी जी को ही प्रधानमंत्री बनाना  किन्तु सोनिया जी ने बहुत ही सादगी से ये पद स्वीकारने से इंकार कर दिया और अगर भाजपा की सुषमा स्वराज और उमा भारती के रवैये को देखा जाये तो उस वक़्त देश में सोनिया जी के समर्थन में दंगे भड़क सकते थे किन्तु ये सोनिया जी ही थी जिन्होंने अपने समर्थकों की भावनाओं  को नियंत्रित कर देश को एक बहुत बड़े आंतरिक युद्ध से बचा लिया और भाजपाइयों ने सोनिया जी के त्याग को किस निम्न दृष्टिकोण से आँका ये भी दिखता है कि एक सशक्त नारी जो कि स्वयं सत्ता सँभालने  में सक्षम थी उसने देश के एक विद्वान हितेषी ईमानदार रत्न डॉ.मनमोहन सिंह जी को देश सँभालने के लिए आगे बढ़ाया तो यूँ कहा गया कि रिमोट कण्ट्रोल सोनिया जी के ही हाथ में है क्या ज़रुरत थी रिमोट की जब पूरा देश उनके साथ था ?
और रही राहुल जी की बात तो वे राजनीति में नए आये और उन्होंने यहाँ की स्थितियों  को समझने के लिए प्रधानमंत्री तो क्या किसी मंत्री पद पर बैठना तक स्वीकार नहीं किया तो इन्हीं भाजपाइयों ने जो कि अपने को बहुत शालीन व् सभ्य कहते हैं ,कोंग्रेसियों की ,सपाइयों की टिप्पणियों को अभद्र कहते हैं ,राहुल गांधी को पप्पू कहना शुरू कर दिया ,इनके सुब्रमणियम स्वामी बात बात पर राहुल की डिग्रियों को लेकर सवाल उठाते हैं जबकि राजनीति में आने के लिए कोई शैक्षिक योग्यता निर्धारित ही नहीं है और वे यहाँ उनकी किसी कंपनी में किसी नौकरी के लिए आवेदन भी नहीं कर रहे फिर किस आधार पर वे इनकी शिक्षा को सवालों के घेरे में लाते हैं?और देश में नव सुधारों के लिए जुटे हुए राहुल जी को बात बात पर बुद्धू कहकर सम्बोधित करना क्या सभ्यता के घेरे में आता है ?
और ये सब तब जब भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मोदी जिस गुजरात के विकास का श्रेय ले रहे हैं उसके बारे में सभी जानते हैं कि वह वहाँ पूर्व में रही हुई कांग्रेस सरकारों के परिश्रम का फल है और मोदी जी की सरकार वहाँ जो कर रही है वह सब मेरी ही एक ब्लॉग पोस्ट में दी गयी प्रतिक्रिया में.खुराना जी ने कुछ यूँ बताया है -
प्रिय शालिनी जी, कृप्या इन बिन्दुओं पर ध्यान दें और पूरी जांच करनें के बाद ही अपना वोट डालें। • गुजरात में अमित जेठवा जैसे RTI कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी जाती है, जिसमें भाजपा के नेताओं के नाम स्पष्ट रुप से शामिल हैं। • गुजरात में 10 साल तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की गई। जब राज्यपाल ने लोकायुक्त को नियुक्ति किया तो राज्य सरकार ने इसको किसी भी तरह से रोकने के लिए मुक्द्दमें में 45 करोड़ खर्च किए। • Supreme Court ने गुजरात सरकार की मंत्री आनंदी बेन पटेल को एक जमीन आवंटन के मामले में दोषी पाया पर वो आज भी गुजरात सरकार में मंत्री बनी हुई हैं। • 400 करोंड़ के मछली पालन घोटाले में कोर्ट द्वारा दोषी पाए गए पुरुषोत्तम सोलंकी गुजरात मंत्रीमंडल को आज भी सुशोभित कर रहे हैं। • भ्रष्टाचार के मामले में जेल यात्रा कर चुके यदुरप्पा को भाजपा पार्टी में फिर शामिल किया। चुनाव के शोर में सच कई बार सुनाई नहीं देता खासकर जब शोर करने वाला झूठ बोलने में माहिर हो। राम कृष्ण खुराना
के द्वारा: R K KHURANA R K KHURANA
अब ये सब देखते हुए सभी मतदाताओं को ये स्वयं विचारना होगा और प्रचार में दी गयी बातों  को अनदेखा करते हुए वास्तविक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ही वोट कर देश में सही सरकार का स्थान सुरक्षित करना होगा क्योंकि गाने और अभिनय से अच्छे दिन लाने का वादा करने वाले ये कुशल अभिनेता कहीं बाद में फाइनेंस कंपनी की तरह आपका सब कुछ लेकर चम्पत न हो जाये .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

1 टिप्पणी:

Anita ने कहा…

विचारणीय पोस्ट..सजगता की बहुत जरूरत है

... पता ही नहीं चला.

बारिश की बूंदे  गिरती लगातार  रोक देती हैं  गति जिंदगी की  और बहा ले जाती हैं  अपने साथ  कभी दर्द  तो  कभी खुशी भी  ...