शनिवार, 5 अप्रैल 2014

यूपीए के 10 साल में तरक्की 3 गुना-

  • लोकसभा चुनाव सर पर आ ही गए हैं और कैसे भी हो इस बार ये कोशिश ऐड़ी से चोटी तक की जा रही है कि कैसे भी हो यू पी ए सरकार को देश को बर्बाद करने वाला साबित कर दिया जाये जबकि वास्तविकता क्या है ये मुझे इंडियन नेशनल कॉंग्रेस के मेल से प्राप्त लिंक से चला जो कि ये है - http://www.tradingeconomics.com/india/gdp और ये लिंक उस वेबसाइट का है जो दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर नज़र रखती है आप सभी चाहें तो स्वयं जाकर इस लिंक के माध्यम से इसकी सच्चाई का अवलोकन कर सकते हैं .वैसे मेल ये था -

    यूपीए के 10 साल में तरक्की 3 गुना- English Available‏

    To: kaushik_shalini@hotmail.com
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    प्रिय मित्र,

    पिछले कई दिनों से हमारे विरोधी दल यह दुष्प्रचार कर रहें हैं कि देश की अर्थवयवस्था चरमरा गई है। उनका आरोप है कि एनडीए के कार्यकाल के दौरान देश चमक रहा था और कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में देश का विकास रुक गया है।
    अब सच जानिए।

    यह आंकड़े http://www.tradingeconomics.com/india/gdp से लिए गएं हैं जो दुनिया के सभी देशों की अर्थ व्यवस्था पर नज़र रखती है।

    1998 में जब NDA ने सत्ता संभाली थी तो देश की GDP 423 Billion Dollar थी। 2004 में जब वो चुनाव हारे थे तो GDP 617 Billion Dollar थी। NDA के समय में भारत की अर्थव्यवस्था 194 Billion Dollar बढ़ी, जो सालाना लगभग 32 Billion Dollar के दर से बढ़ी।

    आज भारत की GDP 1,841 Billion Dollar हो गई है यानि पिछले 10 सालों में हमारी सालाना GDP में 1,224 Billion Dollar की वृद्धी हुई है यानि दस सालों में हमने औसतन 122 Billion Dollar की दर से विकास किया।

    मुम्बई का BSE Index देश की आर्थिक सेहत देखने का एक मापदंड़ हो सकता है। जब 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने देश की कमान संभाली थी तो Sensex  5123.23 points पर था। आज यह 22551.49 points पर है।

    यह महज़ आंकडें नहीं हैं, यह हमारा Report card है। दस साल में अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ीBSE Sensex  में लगभग 4 गुना बढ़ोतरी हुई है, पर हमारे विरोधी अभी भी यह आरोप लगाते नहीं थकते कि देश में विकास नहीं हुआ।

    हम मानतें हैं की पिछले 2 सालों में आर्थिक विकास की गति कुछ कम हुई है पर इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? क्या वो लोग जिम्मेदार नहीं हैं जो किसी न किसी बात पर संसद के काम को रोक देतें हैं? हम कहतें हैं संसद में चर्चा करो पर बहस करने की बजाए वो केवल TV studios  में बयानबाजी करतें हैं।

    पहले यह लोग देश के विकास की गति को रोकतें हैं और फिर इसी को चुनावी मुद्दा बनाकर फिर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करतें हैं। भाषणों से देश का विकास नहीं होता, देश का विकास होता है सही नीतियों से।

    इस बार वोट देनें से पहले आपने दिल पर हाथ रखकर खुद से एक सवाल पूछिएगा, दस साल में आपका परिवार कितना आगे बढ़ा?
    आप आगे बढ़े हैं, देश आगे बढ़ा हैं। सिर्फ  निन्दा करने कि नीति देश हित में नहीं है।

    जय हिंद,
    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस


    अब आते हैं अपने आँखों देखे और स्वयं के प्रत्यक्ष अवलोकन पर -
    -देश में आज वाहनों की बहार है भाजपा के विज्ञापन में अभिनेत्री स्कूटर महंगाई के कारण घर रखने की बात कह रही है जबकि मुझे आज कोई आदमी पैदल चलता नहीं दिखता जिसे देखो घर से चार कदम की दूरी पैदल तय नहीं करना चाहता हर हाथ मोटर साइकिल ,स्कूटी और कार सम्भाले है जबकि कहने को तेल की कीमतें चरम पर हैं .
    -एक समय था जब पी.सी.ओ.देश में फोन करने का माध्यम थे किन्तु आज हर किसी के हाथ में मोबाइल है और पी.सी.ओ. ठप्प हो गए हैं .
    -घर घर में गैस है और यदि गैस की कोई किल्लत है तो इसका कारण सरकार के द्वारा आपूर्ति में कमी न होकर लोगों द्वारा अपनी गैस का इस्तेमाल गाड़ी में करने की कारण है .
    - शिक्षा के लिए गाँव गाँव में स्कूल खुल गए हैं अब बच्चों को शिक्षा के लिए भटकने की ज़रुरत नहीं अब लगभग जितने स्कूल हैं मान्यता प्राप्त हैं और चंद कदम की दूरी पर ही हैं .
    आज शिक्षा के बेहतरीन साधन हैं ,हर साल करोड़ों युवा स्नातक से भी ऊपर की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं जनता को भोजन का अधिकार मिला है .सड़कों की ,यातायात की सुविधा है समस्या अगर है तो हमारी जनसँख्या है जिसके कारण हमारी सारी तरक्की सुरसा के मुंह में जीरा बनकर रह जाती है और इसका दोष यूं.पी.ए. के ऊपर नहीं डाला जा सकता क्योंकि ये हमारी रूढ़िवादिता और अन्धविश्वास की भावना है जो हम इसके चंगुल से नहीं निकल पाते और ऐसे में कोई भी सरकार आ जाये हम विकास की राह के राही नहीं हो सकते क्योंकि कन्या भ्रूण हत्या हम करते हैं ,दहेज़ के लिए बहू हम मारते हैं .घरेलू हिंसा कानून होने पर भी हम ही हैं जो अपना मुंह बंद रख पिटने को प्रस्तुत रहती हैं .ऐसे में अगर दोष देना है तो पहले स्वयं को देना होगा और यूं.पी.ए.सरकार के प्रयास को नकारने जैसी कुत्सित नीति से दूर रहना होगा क्योंकि यूं.पी.ए. ने हमें बहुत कुछ दिया है और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि एक स्थिर देश दिया है न कि अस्थिरता में रहने का श्राप जो कि हमें और पार्टियां देती हैं जिनमे अपने में ही स्थिरता नहीं वे हमें क्या स्थिरता देंगी ,ये तो हमें विचारना ही होगा .
    शालिनी कौशिक
    [कौशल ]

1 टिप्पणी:

Anita ने कहा…

विचारणीय पोस्ट..

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