शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2010

gandhiji aur serve dharm sambhav

कल महात्मा गांधीजी का जन्म दिवस है और हम सभी उन्हें श्रधांजली देने के विषय में सोच रहे हैं अभी कल ही रामजन्म भूमि मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है और ऐसे में सारे देश में अशांति की आशंकाएं फैली हैं यदि हम गांधीजी के सच्चे अनुयायी हैं तो ऐसी कोई आशंका हमे होनी ही नहीं चाहिए क्योंकि गांधीजी दोनों धर्मो के लोगों को अपनी दोनों आँखें मानते थे .ऐसे में यदि हम भी यही माने तो भला आपस में किसी विवाद की कोई जगह हमे नहीं दिखती है. सच्चे अर्थों में हिन्दू मुस्लिम एकता को कायम रखना ही गांधीजी को सच्ची श्रधांजलि होगी.एक शेर में भी यही कहा गया है....
    बोली अलग अलग सही घर बार एक है,भाषाएँ मुख्तलिफ हैं परिवार एक है;
    बैठे हैं एक पद की हम दल दल पर.पक्षी तरह तरह के हैं chahkar एक है.

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