women right-7

पिछले दिनों मैं आपको द.प्र.सहिंता के उस संशोधन के विषय में बता रही थी जो महिलाओं की सहायता हेतु किये गए हैं.आज उसी कड़ी में आगे एक और संशोधन के विषय में और बता रही हूँ-इस अधिनियम के ५ सन २००८ के संशोधन द्वारा बलात्कार के मामलों की सुनवाई २ माह में निबटाने का न्यायालयों को निर्देश दिया गया है.
अब यदि उत्तराधिकार की बात करें तो हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम १९५६ में अगस्त २००५ के संशोधन द्वारा सभी राज्यों में पैत्रक संपत्ति में पुत्रियों को बराबर हिस्सा दिलाये जाने की व्यवस्था की गयी है.
साथ ही उत्तर प्रदेश ज़मींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम १९५० के २७/२००४ के एक्ट द्वारा अविवाहित पुत्री को भी भूमि में बराबर अधिकार दिया गया है अर्थात यदि किसी भूमिधर के पत्नी पुत्री और एक पुत्र है तो भूमिधर की मृत्यु पर तीनो बराबर हिस्सा पाएंगे.
आगे और पढ़ें और यदि कुछ पूछना चाहें तो वो भी पूछ सकती हैं.....

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

aaj ka yuva verg

माचिस उद्योग है या धोखा उद्योग

aaj ke neta