रविवार, 31 अक्तूबर 2010

ichha

वो क्या है,कहाँ है,
      है भी या नहीं
           सोचने को विवश है मन.
din मेरा बचता नहीं है,
          rat यूँ ही कट जाती है,
                क्या यही रहेगा मेरा jeevan.
मेरी इच्छा है इस जग में,
            kuchh ऐसा काम मैं कर dikhlaoon,
जिससे जब chhodoon जग को मैं
            सारी दुनिया को याद मैं aaoon.

कोई टिप्पणी नहीं:

... पता ही नहीं चला.

बारिश की बूंदे  गिरती लगातार  रोक देती हैं  गति जिंदगी की  और बहा ले जाती हैं  अपने साथ  कभी दर्द  तो  कभी खुशी भी  ...