गुरुवार, 14 अक्तूबर 2010

women right in india

भारत में यदि महिलाओं कि स्थिति की बात की जाये तो चंद प्रगतिशील महिलाओं को छोड़कर अधिकांश की बद से बदतर ही मिलेगी और ऐसा नहीं है की हर बार उनकी इस स्थिति के लिए पुरुष वेर्ग ही ज़िम्मेदार हो,बहुत सी बार अपनी वर्तमान दशा की उत्तरदायी महिलाएं स्वयं भी हैं.उनमे अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता कम है,बहुत सी बार पता होते हुए भी अपने परिवार के प्रति भावुकतावश वे अधिकारों का प्रयोग नहीं कर पाती .ऐसी महिलाओं से मेरा तो बस यही कहना है कि अन्याय को सहकर आप अत्याचार को तो बढ़ावा देती ही हैं साथ ही अन्य महिलाओं के लिए भी अपराधी को प्रोत्साहित कर देती हैं.इसलिए जिन महिलाओं को अपने अधिकार पता हैं उन्हें उनका प्रयोग करन चाहिए और जिन को महिलाओं के अधिकार नहीं पता हैं उनके लिए मुझे अभी तक जितने अधिकार पता हैं क्रमवार अपने ब्लॉग "कौशल" के माध्यम से में बताऊंगी और आपसे वादा चाहूंगी कि यदि आपको अधिकार प्रयोग कि आवशयक्ता पड़ी तो आप उनका प्रयोग a वषय करेंगी;
सर्वेप्रथम हम देश के सर्वोच्च कानून संविधान द्वारा  महिलाओं को दिए गए अधिकारों के विषय में जानेगे--
१-अनुच्छेद १५ के अनुसार लिंग ,धरम जाति अथवा जन्मस्थान के आधार पर किसी के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता किन्तु महिलाओं हेतु राज्य अनु.१५(३) के अंतर्गत विशेष उपबंध कर सकता  है.
२-अनु.४० के अंतर्गत त्रिस्तरीय ग्रामीण पंचायतों और शहरी निकायों में सभी स्तरों  में उन्हें एक तिहाई पद आरक्षित करने हेतु संविधान में ७३ वा और ७४ वा संविधान संशोधन किया गया है जिसके परिणामस्वरूप देश कि त्रिस्तरीय  पंचायतों में ८० लाख महिलाओं को जनप्रतिनिधि के रूप में राजनीती और विकास प्रशासन में भाग लेने के अवसर प्राप्त हुए हैं.
३-अनु.३३० व अनु.३३२ क में प्रस्तावित ८४वे संविधान संशोधन द्वारा लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण कि व्यवस्था हेतु प्रयास किये जा रहे हैं.
४-अनु.४२ द्वारा स्त्रियों को विशेष प्रसूति सहायता कि व्यवस्था कि गयी है.
     कल को आपको भा.दंड.सहित कि व्यवस्था बताऊंगी.....

कोई टिप्पणी नहीं:

बेटी की...... मां ?

बेटी का जन्म पर चाहे आज से सदियों पुरानी बात हो या अभी हाल-फ़िलहाल की ,कोई ही चेहरा होता होगा जो ख़ुशी में सराबोर नज़र आता होगा ,लगभग...