शुक्रवार, 8 अक्तूबर 2010

ramayan prabhav

रामायण का हर अंश दिल पर गहरे तक असर करता है.मन करता है कि किसी तरह राम को वन जाने से रोक दे किन्तु यही तो वेह नियति है जिसे पलटना मनुष्य के हाथ में नहीं है किन्तु जहाँ तक कुछ करने कि बात है तो रामायण से कुछ शिक्षाएँ हम ले सकते हैं और उन्हें अपने जीवन में उतरकर अपना जीवन सफल बना सकते हैं और एक आदर्श samaj कि स्थापना कर सकते हैं;-
 १-माता पिता कि आज्ञा को shirodharay  करना.
२-नारी का धरम वही जो महारानी सुनयना सीता उर्मिला मांडवी और श्रुतकीर्ति को समझाती हैं;
३-नारी का धरम वही जिसका पालन सीता,उर्मिला.मांडवी करती हैं.
४-पति का धरम वह जिसका पालन राम करते हैं.
५-अनुज का धरम लक्ष्मण कि तरह निभाना.
६-किसी अन्य की बात पर यकीन कर अपने घर में कभी कलह नहीं करनी चाहिए.
     इस तरह यदि हम देखें तो रामायण में हर कदम पर आदर्श हैं.जिनका जीवन में उतरना आज के भोतिकवादी मनुष्य के वश में नहीं है किन्तु कुछ कोशिश तो हम कर ही सकते हैं.यदि हम ऐसी कोशिश करते हैं तो रामायण देखना या रामलीलाओं में अभिनय करना sarthak ho jayega.

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विकिपीडिया से साभार   आज जन्मदिन है देश के  नौवें राष्ट्रपति  डाक्टर शंकर दयाल शर्मा जी का और वे सदैव मेरे लिए श्रद्धा के पात्र रहेंगे...