रविवार, 9 मार्च 2014

होम मेकर -नेशन मेकर तो नारी पहले ही है मोदी जी .









       महिला शक्ति एक ऐसी शक्ति जिसका राजनीति के गलियारों में एक अलग महत्वपूर्ण स्थान है .जिसे हमारे राजनीतिज्ञों द्वारा किसी सम्प्रदाय विशेष या जाति विशेष में विभक्त नहीं किया जाता .जिसके लिए केवल एक ही भाव सबके मन में रहता है कि महिलाएं भी 'हम विशेष 'से जुड़ें .आज राजनीतिक दल महिलाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए उन्हें लुभाने में जुटे हैं ,ऐसे में कोई सार्थक ,ज़मीन से जुडी सच्चाई बयां कर रहा है तो कोई अनर्गल प्रलाप ,हवा में उड़ती तितलियों सी बाते बना रहा है . राहुल गांधी जहाँ महिलाओं को अपनी शक्ति को पहचानकर आगे बढ़ने की बात कह रहे हैं वहीँ नरेंद्र मोदी हर जगह अपने सामान्य ज्ञान की गलतियां ही दोहरा रहे हैं .राहुल गांधी का कहना सही है क्योंकि महिलाएं स्वयं ही पति बच्चों व् परिवार की भलाई के लिए अपने लिए दुर्दशा ओढ़ लेती हैं यदि वे अपनी सही शक्ति पहचानकर कार्य करें तो वे एक सत्ता पलटना तो क्या बड़ी बात है ये संसार पलट सकती हैं क्योंकि इस संसार की नींव महिलाएं ही हैं किन्तु नरेंद्र मोदी जी जो कह रहे हैं उससे साफ़ स्पष्ट है कि वे नारी शक्ति के बारे में कुछ नहीं जानते .वे कह रहे हैं
- ''होम मेकर से नेशन मेकर बनें ''
साथ ही वे कह रहे हैं कि महिलाओं को जीवन साथी चुनने ,करियर सम्बन्धी व् संतान पैदा करने सम्बन्धी स्वतंत्रता मिले .आज जिन महिलाओं के बीच बैठकर वे ये मुद्दे उठा रहे हैं वे पहले ही जीवन साथी अपनी पसंद का चुन रही हैं ,कैरियर अपनी मर्जी से बना रही हैं ,संतान अपनी मर्ज़ी से पैदा कर रही हैं या इस सम्बन्ध में विलम्ब का रवैया अपना रही हैं .विशेष रूप से ये बात उन्ही महिलाओं के सम्बन्ध में है जिनके साथ बैठकर नरेंद्र मोदी ''चाय पर चर्चा '' कर रहे हैं और नहीं देख पा रहे हैं कि वे स्वयं कितने बड़े अज्ञानता पथ पर चल रहे हैं .आज तो कहने को हम सभी विकसित राष्ट्र होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तब यहाँ की नारी शक्ति का विकास की राह पर कदम बढ़ाना कोई नयी बात नहीं कही जा सकती किन्तु तब ये अवश्य नयी बात थी जब हमारा देश रूढ़ियों ,परम्पराओं की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था और हमारी नारी शक्ति ने ही वही सब किया था जो आज कहकर नरेंद्र मोदी जी एक बार फिर वाहवाही लूटने को प्रयासरत हैं .सरदार पटेल के देश हित सम्बन्धी विचारों व् कार्यों की बहती गंगा में हाथ धोकर अपने को सत्तासीन करने के लिए पवित्र दिखाने की होड़ में लगे मोदी जी नारी शक्ति को वही अधिकार पाने को ,सहायता देने की बात कह रहे हैं ,प्रेरित कर रहे हैं जो वह बहुत पहले से ही अपने हाथ में रखती है और प्राचीन समय से लेकर आज तक जिसे अपने देश,समाज ,परिवार और स्वयं के हित में समय आने पर प्रयोग भी करती रही है .अपनी जानकारी को सुदृढ़ करने के लिए वे गुलाबी गैंग की सम्पत पाल से मिल सकते हैं या फिर ''गुलाब गैंग ''फ़िल्म में रज्जो को देख सकते हैं या फिर निम्न उदाहरण पढ़कर अपनी जानकारी बढ़ा सकते हैं -
*अच्छन कुमारी [इच्छिनी ]-ये पृथिवी राज चौहान की पत्नी थी .११९२ ईस्वी में गौरी का आक्रमण होने पर जब पृथ्वीराज कैद कर लिए गए तो अच्छन कुमारी खुद घोड़े पर चढ़ नंगी तलवार हाथ में ले राजा को कैद से छुड़ाने के लिए चल पड़ी .वे इस युद्ध में मारी गयी किन्तु अपने स्वामी व् राजपूतों की रक्षा के लिए उन्होंने वीरता पूर्वक आत्मबलिदान कर दिया और ये भी उल्लेखनीय है कि उन्होंने पृथ्वीराज चौहान से अपनी पसंद से विवाह किया था .
*राजमाता कर्म देवी - मेवाड़ की क्षत्राणी ये राजमाता कुंवर कर्ण के छोटे होने के कारण कुतुबुद्दीन के आक्रमण के समय सैनिकों का उत्साह बढ़ाते हुए स्वयं आगे आई और उन्होंने कहा -''मैं सेनापति बनकर युद्ध में सबसे आगे रहूंगी .''इस प्रकार कुशलता पूर्वक युद्ध का सञ्चालन कर कुतुबुद्दीन ऐबक को पराजित किया और मेवाड़ पर आंच न आने दी .
*सुल्ताना रजिया -इन्हें इनके कुशाग्र बुद्धि ,न्यायप्रिय व् सामरिक गुणों से युक्त होने के कारण पुत्रों को निकम्मे व् अयोग्य समझ इल्तुतमिश ने अपना उत्तराधिकारी बनाया और उन्होंने १२३६ से १२४० तक शासन सम्भाला .
*पन्ना धाय -चित्तौड़ के राजकुमार उदय सिंह की रक्षा के लिए पन्ना धाय ने अपने पुत्र का बलिदान दिया और राजकुमार उदयसिंह को कुम्भलगढ़ भिजवाकर उनका पालन-पोषण किया और वही उदय सिंह १५४० में मेवाड़ के स्वामी बने .
*जीजाबाई -शिवाजी की माता और पति द्वारा परित्यक्ता होने के बावजूद पुत्र शिवाजी को राजा बनने योग्य बनाया .आज इनके नाम से भारत सरकार द्वारा मानव संसाधन मंत्रालय का जीजाबाई स्त्रीशक्ति पुरुस्कार महिलाओं को दिया जाता है .
*अहिल्या बाई होल्कर -इंदौर जिले के राजाधिराज खांडेराव की पत्नी अहिल्या बाई ने उनकी मृत्यु के बाद इंदौर का शासन प्रबंध सम्भाला और बेटे मालेराव की मृत्यु होने पर भी विचलित नहीं हुई .१७६६ से १७९५ तक इंदौर का शासन प्रबंध कुशलता पूरवक सम्भाला .
*राजबाई -काठियावाड़ [गुजरात ]के बढ़वाएं में स्त्रियों के ही अधिकार राज्य सिंहासन पर होते थे .इनका विवरण इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि ये स्वयं नरेंद्र मोदी जी के गुजरात से ही थी और उन्होंने पति-पुत्रों की उपस्थिति में राज्य शासन प्राप्त किया था .शासन की समस्त योग्यता वाली राजबाई को उनकी पुत्रवधु गोवलबाई ने बिलकुल वैसे ही अपदस्थ करने का निश्चय किया जैसे आज नरेंद्र मोदी कॉंग्रेस को अपदस्थ करने की चेष्टा में लगे हैं .सत्ता पाने को जिस तरह मोदी कॉंग्रेस को ,सोनिया जी को बूढी ,बीमार कहकर हटाने में जुटे हैं उस शब्द उच्चारण की महिमा उनके गुजरात के ही इतिहास में दिखायी दे गयी जब रानी बनने की लालसा में गोवलबाई ने अपनी सास को वृद्धा कह नगर में नहीं आने दिया और फिर राजबाई ने सैन्य संग्रह द्वारा राज्य का द्वार खुलवाया और गोवलबाई भाग खड़ी हुई और फिर प्रजा ने अपनी वृद्धा रानी का स्वागत किया और उन्होंने फिर लम्बी आयु पाई व् जीवन के अंतिम समय तक शासन का सञ्चालन किया .
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*देवी चौधरानी -देश की प्रथम स्वतंत्रता सेनानी महिला .
*मैडम भीकाजी कामा -क्रांतिकारियों की सहयोगिनी १९०७ में जर्मनी के स्टुटगार्ड में पहलीबार राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाली इन्होने ही सावरकर को काले पानी की सजा होने पर उनके परिवार का पालन किया था .
*इंदिरा गांधी -भारत की पहली व् अब तक की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री .
महारानी लक्ष्मीबाई ,नर्तकी अजीजन ,स्वतंत्रता सेनानी श्रीमती इंदुमती सिंह,गवर्नर स्टेनले पर गोली चलाने वाली महिला वीणा दास ,प्रथम शहीद क्रांतिकारी महिला प्रीतिलता वादेदार ,नागालैंड की रानी गिडालू जिनके बारे में जवाहर लाल नेहरू ने लिखा था ''कि एक दिन वह आएगा जब भारत उसे याद करेगा और उसका सम्मान करेगा .''भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस की अध्यक्ष नेली सेनगुप्ता ,भारत कोकिला देश की पहली महिला राज्यपाल सरोजनी नायडू ,देश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी .संयुक्त राष्ट्र की महासभा की पहली महिला अध्यक्ष होने का गौरव पाने वाली विश्व की पहली महिला विजयलक्ष्मी पंडित ,कस्तूरबा गांधी ,स्वरुप रानी नेहरू ,डॉ.आनंदी जोशी अपनी रूचि के अनुसार पहनावा रखने वाली ,देविका रानी अपनी मर्जी से हिमांशु राय डॉ.रोरिख से शादी करने वाली ,अपने पिता की मर्जी के खिलाफ फिरोज गांधी से शादी करने वाली इंदिरा गांधी ,सामाजिक रीतिरिवाज के खिलाफ जाकर अपनी पुत्री का कन्यादान न करने वाली सुभद्रा कुमारी चौहान ,अपने परिवार का हित देख अविवाहित रहने वाली लाता मंगेशकर ,अपनी पसंद से विवाह करने वाली आशा भौंसले ,अपनी इच्छा से पंडवानी को विश्व में एक पहचान दिलाने के लिए लोक गायकी में कैरियर बनाने वाली तीजन बाई ,अरुंधति राय, उषा नारायणनन ,किरण बेदी ,राजनीति में अपना दम-ख़म रखने वाली ममता बैनर्जी -सुषमा स्वराज-जयललिता -मायावती जैसी नेत्रियां ,पेप्सिको की सी .ई.ओ इंदिरा नूई आदि पता नहीं कितने नाम और भी होंगे जो नारी शक्ति को एक शिखर पर पहचान दिलाये हैं किन्तु नरेंद्र मोदी जी की जानकारी इतनी कम है कि वे इन सबके बारे में क्या जानेंगे जब उन्हें अपनी पत्नी जशोदा बेन के द्वारा अपनायी गयी स्वतंत्रता का ही भान नहीं जो कि वे अपने एक ऐसे साक्षात्कार में जिसमे उन्होंने अपना फोटो तक नहीं आने दिया स्वयं स्वीकार चुकी हैं कि मोदी से अलग होने का निश्चय स्वयं उनका अपना था ऐसे में जब एक गाँव की सीधी सादी महिला तक ऐसा कर सकती है तो मोदी इसके लिए क्यूँ चाय पर चर्चा कर अपना व् देश का समय बर्बाद कर रहे हैं .
अंत में बस मोदी जी को नारी शक्ति के बारे में बस इतना ही कहा जा सकता है -
''तुम भूले सीता सावित्री ,क्या याद मुझे रख पाओगे ,
खुद तहीदस्त हो इस जग में ,तुम मुझको क्या दे पाओगे .
शहकार है नारी ख़िलक़त की ,''शालिनी ''झुककर करे सलाम
इजमालन सुनलो इबरत ये ,कि खाक भी न कर पाओगे .''
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक आलेख।

shikha kaushik ने कहा…

very well written .congr8s

Aditi Poonam ने कहा…

सुंदर और सार्थक आलेख.....

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