मंगलवार, 4 मार्च 2014

बेटे-बेटी में फर्क नहीं कोई



Sad beautiful woman looking out the window - stock photo

वह

मर गयी

जलकर

अकेली थी

बीमार थी

बुढ़ापे की ओर बढ़ रही

साठ वर्षीया लाचार थी

और खास बात ये

वो बेटों की माँ थी

बेटे

जिनके व्यस्त जीवन में

माँ की जगह ना थी

पर

वह

ज़िंदा है

लाचार है

बूढी है

पति की दौलत से

बेटी का घर बनाया

और बेटी

ने माँ को

वृद्धाश्रम भिजवाया

आज

जलकर मरती माँ

वृद्धाश्रम में बैठी माँ

देख

समझ में

यही आया

बेटे-बेटी

में नहीं

कोई

अंतर

दोनों ने

ही अलग

किया है

माँ

को

बोझ

समझकर !



.....

शालिनी कौशिक

[कौशल ]


1 टिप्पणी:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

समाज का यह दुर्गुण इसे कमजोर कर देगा।

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