मीडिया कॉर्पोरेट घरानों को बिका
लोकसभा चुनाव २०१४ का निर्णय अभी आना शेष है किन्तु जिस तरह से मीडिया द्वारा कांग्रेस विरोधी और मोदी के पक्ष में प्रचार किया जा रहा है उससे ये तो साफ़ हो ही गया है कि इस बार के चुनाव केवल और केवल मीडिया ही लड़ रहा है कभी भी कहीं भी राहुल गांधी जी की रैलियों की सफलता का कोई ब्यौरा समाचारपत्रों की सुर्खियां नहीं बनता और मोदी जी के हर स्थान के भाषण को पूरे विवरण देकर प्रकाशित किया जाता है .दूरदर्शन पर साफ तौर पर दिखाया जाता है कि राहुल गांधी के लखनऊ दौरे में लोगों का हुजूम उनके साथ था किन्तु समाचार पत्र कहते हैं कि राहुल भीड़ न देख कर निराश हुए जबकि कहीं से लेकर कहीं तक भी राहुल गांधी के चेहरे पर निराशा के भाव नज़र नहीं आते .आज के समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी है एक खबर कि ''कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान में मिडिल क्लास गायब, नेता नाखुश '' और इस समाचार से मीडिया क्या दिखाना चाहता है यह खुलकर सामने आ रहा है क्योंकि दूरदर्शन जो कि देश का सबसे ज्यादा प्रसार पाने वाला चैनल है उस पर आरम्भ से ही जिस वर्ग से जुड़े कॉंग्रेस के विज्ञापन आ रहे हैं वह मध्यवर्ग ही है .''दस सालों में हुई प्रगति ,हसीबा अमीन के विज्ञापन और अब मेरा वोट कांग्रेस को ''ये सभी विज्ञापन कांग्रेस को मध्यवर्ग से जोड़ते हैं फिर क्यूँ भ्रामक प्रचार द्वारा मीडिया कांग्रेस से जनता को तोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहा है .मीडिया भले ही मोदी लहर को कितना प्रचारित कर ले किन्तु ये कहर जिन स्थानों पर है वे आज भी आम जनता के घरों से आस-पास से बहुत दूर हैं क्योंकि अभी जनता में इतनी संचार क्रांति नहीं है कि वह बैठकर इनकी वेबसाइट ही देखती रहे और सच्चाई को महसूस न कर सके और मीडिया के यह भ्रामक प्रचार ये तो साबित कर ही रहे हैं कि आखिर मीडिया के पास मोदी के पक्ष और कांग्रेस के विपक्ष के लिए इतना पैसा कहाँ से आ रहा है सभी जान गए हैं और स्वयं मीडिया इसका प्रचार कर रहा है तो जनता भी जानती है कि ये सब वही कॉर्पोरेट घरानों की कारगुज़ारी है जो मोदी को प्रधानमंत्री बनाकर अपना उल्लू सीधा करना चाह रहे हैं और मीडिया उनके हाथों बिक गया है .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]
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सही कहा आपने.
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