सोमवार, 29 अगस्त 2011

न छोड़ते हैं साथ कभी सच्चे मददगार.


आंसू ही उमरे-रफ्ता के होते हैं मददगार,
न छोड़ते हैं साथ कभी सच्चे मददगार.

मिलने पर मसर्रत भले दुःख याद न आये,
आते हैं नयनों से निकल जरखेज़ मददगार.

बादल ग़मों के छाते हैं इन्सान के मुख पर ,
आकर करें मादूम उन्हें ये निगराँ मददगार.

अपनों का साथ देने को आरास्ता हर पल,
ले आते आलमे-फरेफ्तगी ये मददगार.

आंसू की एहसानमंद है तबसे ''शालिनी''
जब से हैं मय्यसर उसे कमज़र्फ मददगार.


कुछ शब्द-अर्थ:
उमरे-रफ्ता--गुज़रती हुई जिंदगी,
जरखेज़-कीमती,
मादूम-नष्ट-समाप्त,
आलमे-फरेफ्तगी--दीवानगी का आलम.

शालिनी कौशिक
http://shalinikaushik2.blogspot.com

30 टिप्‍पणियां:

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना....

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत खूब कहा है आपने हर पंक्ति में ।

Pallavi ने कहा…

बहुत अच्छे शलिनी जी... जितने अच्छे आपकी भावनाये हैं। इस कविता में उतनी ही खूबसूरत तस्वीर भी चुनी है आपने अपनी इस रचना के लिए :)

रेखा ने कहा…

बेहतरीन और खुबसूरत गजल ..

बंदना कोंडल ने कहा…

क्या बात है...............वाह ..

"न छोड़ते हैं साथ कभी सच्चे मददगार."

बंदना कोंडल ने कहा…

सही कहा आपने शलिनी जी.....भावपूर्ण रचना...
"न छोड़ते हैं साथ कभी सच्चे मददगार."

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice Urdu .

Nice poem .

अजय कुमार ने कहा…

achchhee rachana , sundar bhaaw

Sunil Kumar ने कहा…

क्या बात हैं, हर शेर खुबसूरत, दाद को मुहताज नहीं फिर भी दिल से निकला, वाह वाह....

Rajey Sha राजे_शा ने कहा…

सच है आंसू दि‍ल हल्‍का करने में काफी मददगार होते हैं, अगर कोई नि‍*स्‍वार्थ कंधा मि‍ले...
पढ़ि‍ये नई कवि‍ता : कवि‍ता का वि‍षय

रविकर ने कहा…

बहुत सुन्दर शालिनी जी ||
बधाई स्वीकारें ||

kumar ने कहा…

बहुत खूब

kshama ने कहा…

आंसू की एहसानमंद है तबसे ''शालिनी''
जब से हैं मय्यसर उसे कमज़र्फ मददगार.
Bahut khoob liktee hain aap!

शिखा कौशिक ने कहा…

VERY NICE .VERY AWESOME PHOTO .CONGR8S

Atul Shrivastava ने कहा…

गहरे भाव लिए प्रस्‍तुति।
शब्‍दों का चयन लाजवाब।
शुभकामनाएं आपको.........

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

ब्लॉगर्स मीट वीकली (6) Eid Mubarak में आपका स्वागत है।
इस मुददे पर कुछ पोस्ट्स मीट में भी हैं और हिंदी ब्लॉगिंग गाइड की 31 पोस्ट्स भी हिंदी ब्लॉग जगत को समर्पित की जा रही हैं।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Behtreen Panktiyan

Manish Kr. Khedawat " मनसा " ने कहा…

bahut sunder :)
magar wo bechare ashq , unhe to aankho main bhi jagah nahi milti :P)

वाणी गीत ने कहा…

अच्छी पंक्तियाँ है ...

pradeep tiwari ने कहा…

bhut hi pyari abhivakti hai

pradeep tiwari ने कहा…

bhut hi marmik prastuti hai

आशीष अनचिन्हार ने कहा…

vah

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

बहुत खूबसूरत है!

एम सिंह ने कहा…

बेहद प्रभावी. खूबसूरत.

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से 1 ब्लॉग सबका

फालोवर बनकर उत्साह वर्धन कीजिये

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

आंसू ही उमरे-रफ्ता के होते हैं मददगार,न छोड़ते हैं साथ कभी सच्चे मददगार.
मिलने पर मसर्रत भले दुःख याद न आये,आते हैं नयनों से निकल जरखेज़ मददगार.
मन की मनोदशा को बहुत खूबसूरती से व्यक्त किया है ...आद.शालिनी कौशिकजी, आपने

देवेन्द्र ने कहा…

वाह क्या खूबसूरत भाव लिये शेर हैं। शुबान अल्लाह ।

NISHA MAHARANA ने कहा…

न छोडते हैं साथ कभी सच्चे मददगार ।
बिल्कुल सही।

सियाना मस्कीनी ने कहा…

आग कहते हैं, औरत को,
भट्टी में बच्चा पका लो,
चाहे तो रोटियाँ पकवा लो,
चाहे तो अपने को जला लो,

Dr. Ashok Madhup ने कहा…

Shalini Ji! I appreciate, your Poeoms, Ghazals & Blog are very much Beautiful. I like it and I would like to please visit my Blog - Tumchhulo(http://tumchhulo.
blogspot.com) and also post your comments please.
Dr. Ashok Madhup (Geetkar),
NOIDA.

कानून पर कामुकता हावी

१६ दिसंबर २०१२ ,दामिनी गैंगरेप कांड ने हिला दिया था सियासत और समाज को ,चारो तरफ चीत्कार मची थी एक युवती के साथ हुई दरिंदगी को लेकर ,आंदोल...