शनिवार, 12 अक्तूबर 2013

अखिल जगत में राम नारी का इसलिए अभिमान हैं .

मर्यादा से बंधे हुए वे पुरुषोत्तम भगवान हैं ,
दशरथ जी के राजदुलारे मनभावन श्रीराम हैं .

मात सुमित्रा कैकयी का वे कौशल्या सम मान करें ,
भरत शत्रुघ्न लखन लाल को ये प्रभु का वरदान हैं .

पालन करें पितु वचन का ब्रह्म ऋषि के साथ चले ,
करते वध हैं राक्षसों का रखते यज्ञ का ध्यान हैं .

ब्रह्म ऋषि की आज्ञा मानी धनुष यज्ञ में भाग लिया ,
सीता से नाता जोड़ें वे रखते क्षत्रिय मान हैं .

वचन पिता ने दिए मात को पूरा उनको राम करें ,
राज-पाट से श्रेष्ठ ह्रदय में तब वन का स्थान है .

लखन सिया के संग संग वन में ऋषियों के उपदेश सुनें,
रक्षा करते सभी जनों की करते नहीं गुमान हैं .

न्याय दिलाएं मित्र को अपने बालिवध का काज करें ,
मित्रता का समस्त विश्व में सर्वश्रेष्ठ प्रमाण हैं .

सिया हरण का सबक सिखाने रावन का संहार करें ,
अखिल जगत में राम नारी का इसलिए अभिमान हैं .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

1 टिप्पणी:

राजेंद्र कुमार ने कहा…

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,विजयादशमी (दशहरा) की हार्दिक शुभकामनाएँ!

हस्ती ....... जिसके कदम पर ज़माना पड़ा.

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