शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

मोदी जैसे नेताओं की छवि की धज्जियाँ


न चाहते हुए भी इस विषय पर लिखने को मुझे आगे आना पड़ा है क्योंकि मैं देख रही हूँ कि हमारे देश में अंधभक्ति कुछ हद से ज्यादा ही है और इसी का असर है कि बहुत से विचारों में अपने प्रिय नेता से मतभेद होने के बावजूद भी उनके साथ जुड़ लेते हैं .
देवालय और शौचालय ,दो स्थान ,दोनों महत्वपूर्ण किन्तु दोनों का एक साथ जोड़ दिया जाना ये हमारे नेताओं द्वारा ही किया जा सकता है क्योंकि वास्तु शास्त्र भी इन्हें अलग स्थान देता है देवालय जहाँ उत्तर-पूर्व इशान कोण में बनाये जाते हैं वहीँ शौचालय दक्षिण-पश्चिम में स्थान पाता है .एक का स्थान हमारे मानसिक विकास ,शांति के लिए अत्यंत आवश्यक है तो दुसरे का स्थान शारीरिक दृष्टि से ज़रूरी किन्तु इन दोनों के विषय में एक साथ बात करना संभव ही नहीं है और मोदी ने ये बात कहकर जिस बहस को हवा दी है वह हमारे नेताओं के चरित्र के छिपे पहलु को उजागर करने के लिए पर्याप्त है ,यही कि इनका मन केवल अपना हित देखता हैं भले ही इसके लिए इन्हें सीधी धरती को उल्टा करना पड़ जाये ,भले ही पूर्व को पश्चिम करना पड़ जाये .
जहाँ अपना कार्यक्षेत्र हो वहां ये कुछ नहीं करते और जहाँ इन्हें केवल जनता को भरमाना हो वहां उससे जुडी बहुत सी ऐसी बातों को उभारेंगे जो उसकी दुखती नब्ज़ से जुडी हों किन्तु इससे पहले वे ये नहीं देखते कि जिस शौचालय के लिए वे जनता की भावनाओं को उभारना चाह रहे हैं उसके लिए वह ही कितनी ईमानदार है कि उसके लिए उसमे जागरूकता भरने हेतु विद्या बालन को ही सरकार को ब्रांड एम्बेसडर बनाना पड़ा .
जो जनता इसके लिए अपने घर में स्थान नहीं चाहती क्योंकि वह इसे घर में उपयुक्त नहीं मानती वह इस तरह की बातों पर उखड भी सकती है किन्तु इन्हें इस सबसे कुछ भी लेना देना नहीं है इन्हें तो बस यही चाहिए कि कैसे भी करके हम जनता को बहका लें और उनसे अपने सत्ता पाने का रास्ता सुलभ बना लें .
आज ये शौचालय को लेकर गंभीरता दिखा रहे हैं किन्तु अपने पुराने वादों का क्या करेंगे जिनमे इन्होने जनता से मंदिर का वादा किया और कहा -
रामजी का मंदिर बनेगा धूमधाम से .
आज तक वह मंदिर कहाँ है जिसके लिए इन्होने जनता को कारसेवा के नाम पर बलि चढ़ा दिया था आज इनके इस वक्तव्य की उनके सदा सहयोगी विनय कटियार भी आलोचना कर रहे हैं और क्या अब यही मुद्दा बचा है जनता को पागल बनाने का ,जिसे उठाकर वे अपने लिए सत्ता का द्वार खोलना चाह रहे हैं और यदि वे स्वयं इसके लिए कुछ करना चाह रहे हैं तो पहले अपने हैट्रिक प्रदेश को ही देख लें जहाँ की स्थिति

Power of Youth @iparthpatel8h@parthesh_99:गुजरात के 30% प्रतिशत स्कूल में लडकियों के लिए शौचालय की सुविधा है नहीं और देश के लोगो को सलाह देने निकला है मोदी @myavysion
आज ट्वीट में ही खुल कर सामने आ रही है और मोदी जैसे नेताओं की छवि की धज्जियाँ उड़ा रही है .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

9 टिप्‍पणियां:

ajay yadav ने कहा…

सटीक लेखन .समसामयिक चर्चा

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (06-10-2013) हे दुर्गा माता: चर्चा मंच-1390 में "मयंक का कोना" पर भी है!
--
शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रविकर ने कहा…

नवरात्रि की शुभकामनायें-
सुन्दर प्रस्तुति है आदरणीया

Ramakant Singh ने कहा…

सागर को गागर में भरती संतुलित पोस्ट किन्तु इसका जवाब खली या कहूँ निरंक मिलेगा बेहतरीन सोच लिए वाह

Darshan jangra ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - सोमवार - 07/10/2013 को
अब देश में न आना तुम गाधी
- हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः31
पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

मोदी को सिर्फ बड़ी २ बात करना और
उद्दोगपतियों
को पटाना आता है,

नवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनायें-
RECENT POST : पाँच दोहे,

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

प्रवीण पाण्डेय …
जो मन में भरा होगा, वही बाहर आयेगा। शारीरिक और मानसिक शुचिता आधारभूत हैं।

आशा जोगळेकर
काग्रेस तो मौका ढूढ ही रही थी कि कब मोदी को घेरे तो मिल गया मौका । पर बात सही है पहले शुचिता फिर सु-चित्त। अंग्रेजी के हिमायती भी जान लें कि Cleanliness is next to Godliness.

मोदी साहब के "शौचालय " के बयान का मतलब सिर्फ इतना है आदमी का पहले तन पवित्र हो फिर मन की शुचिता हो। फिर वह मंदिर

जाए।

मोदी के बयान में अटपटा कुछ भी नहीं है।

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

चेहरा उनका देखो ,

सगरी उड़ गई रंगत .

मोदी पे जब वार करें ,

उड़ जाती रंगत। रविकर जीवन व्यस्त, करे कविता जनहित की-
चित की शुचिता के लिए, नित्य कर्म निबटाय |
ध्यान मग्न हो जाइये, पड़े अनंत उपाय |
पड़े अनंत उपाय, किन्तु पहले शौचाला |
पढ़ देवा का अर्थ, हमेशा देनेवाला |
रविकर जीवन व्यस्त, करे कविता जनहित की |
आत्मोत्थान उपाय, करेगी शुचिता चित की ....
रविकर की कुण्डलियाँ

कालीपद प्रसाद ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति | मोदी भी बडबोला है |
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