गुरुवार, 24 अक्तूबर 2013

गागर में भरती सागर ,ये दिल से ''शालिनी'' है .

दफनाती मुसीबत को ,दमकती दामिनी है .

कोमल देह की मलिका ,ख्वाबों की कामिनी है ,

ख्वाहिश से भरे दिल की ,माधुरी मानिनी है .
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नज़रें जो देती उसको ,हैं मान महनीय का ,
देती है उन्हें आदर ,ऐसी कामायनी है .
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कायरता भले मर्दों को ,आकर यहाँ जकड़ ले ,
देती है बढ़के संबल ,साहस की रागिनी है .
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कायम मिजाज़ रखती ,किस्मत से नहीं रूकती ,
दफनाती मुसीबत को ,दमकती दामिनी है .
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जीवन के हर सफ़र में ,चलती है संग-संग में ,
गागर में भरती सागर ,ये दिल से ''शालिनी'' है .
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शब्दार्थ -महनीय-पूजनीय /मान्य ,कामायनी -श्रृद्धा ,कायम मिजाज़ -स्थिर चित्त ,शालिनी -गृहस्वामिनी .

शालिनी कौशिक

[कौशल ]

8 टिप्‍पणियां:

kshama ने कहा…

Behad sundar! Diwali mubarak ho!

ALBELA KHATRI ने कहा…

वाह !
क्या कहने

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (25-10-2013)
ऐसे ही रहना तुम (चर्चा मंचः अंक -1409) में "मयंक का कोना"
पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर रचना..

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : उत्सवधर्मिता और हमारा समाज

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (26-10-2013) "ख़ुद अपना आकाश रचो तुम" चर्चामंच : चर्चा अंक -1410” पर होगी.
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
सादर...!

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

शब्द कोष में इजाफा करवाती सुन्दर रचना।

Ranjana Verma ने कहा…

बहुत खुबसूरत रचना .....